प्रयागराज

मिश्रपुर में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा तृतीय दिवस भक्ति और वैराग्य से दूर किया जा सकता है कष्ट

भागवत कथा सुनने मात्र से मनुष्य को मोक्ष प्राप्त हो जाता है आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी

कोरांव प्रयागराज कोराव तहसील के अंतर्गत आने वाले मिश्रपुर ग्राम सभा में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन ध्रुव चरित भरत चरित्र एवं प्रहलाद चरित्र के बारे में कथावाचक लक्ष्मी नारायण तिवारी जी के द्वारा विस्तार से वर्णन करते हुएतीसरे दिन की कथा में जड़ भरत चरित्र अजामिल आख्यान ध्रुव चरित्र प्रहलाद चरित्र आदि का वर्णन किया। कथा व्यास ने जड़ भरत चरित्र का वर्णन करते हुए यह बताया कि जो संत संसार का संग करते हैं। उन्हें पतन की ओर जाना पड़ता है, पर जो संसारी लोग संत का संग करते हैं। उनकी स्थिति उच्च हो जाती है, इसलिए संत को संसार के पदार्थों की आसक्ति से दूर रहना चाहिए। संत ने नरक का वर्णन करते हुए कहा कि जो हम पाप करते हैं वही एक प्रकार से नर्क की प्राप्ति कराने वाला होता है। पाप कर्म से बचना व तुच्छ कर्मों से बचना ही सबसे बड़ा पुण्य का काम है। इस दौरानभागवत कथा के तीसरे दिन विभिन्न प्रसंगों पर किए प्रवचन
. कथावाचक लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि मनुष्य जीवन में जाने अनजाने प्रतिदिन कई पाप होते है। उनका ईश्वर के समक्ष प्रायश्चित करना ही एक मात्र मुक्ति पाने का उपाय है। उन्होंने ईश्वर आराधना के साथ अच्छे कर्म करने का आह्वान किया। में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन कथा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने जीवन में सत्संग व शास्त्रों में बताए आदर्शों का श्रवण करने का आह्वान करते हुए कहा कि सत्संग में वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को बदल देती है। उन्होंने कहा कि व्यक्तियों को अपने जीवन में क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा, संग्रह आदि का त्यागकर विवेक के साथ श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए। व्यासपीठाधीश्वर ने शुक्रवार को भागवत कथा के दौरान कपिल चरित्र, सती चरित्र, धु्रव चरित्र, जड़ भरत चरित्र, नृसिंह अवतार आदि प्रसंगों पर प्रवचन करते हुए कहा कि भगवान के नाम मात्र से ही व्यक्ति भवसागर से पार उतर जाता है। उन्होंने भगवत कीर्तन करने, ज्ञानी पुरुषों के साथ सत्संग कर ज्ञान प्राप्त करने व अपने जीवन को सार्थक करने का आह्वान किया। भजन मंडली की ओर से प्रस्तुत किए गए भजनों पर श्रोता भाव विभोर होकर नाचने लगे।
मिश्रपुर गांव में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि वैराग्य मानव को ज्ञानी बनाता है। वैराग्य में मानव संसार में रहते हुए भी सांसारिक मोहमाया से दूूर रहता है। उन्होंने वाराह अवतार सहित अन्य प्रसंगों पर प्रवचन किए। इससे पूर्व यजमान इंद्रमणि मिश्र की ओर से पूजा-अर्चना की गई। इसी प्रकार कथास्थल पर श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति सहित अन्य प्रसंगों पर प्रवचन किए।भागवत कथा के तीसरे दिन विभिन्न प्रसंगों पर किए प्रवचन
कथावाचक लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि मनुष्य जीवन में जाने अनजाने प्रतिदिन कई पाप होते है। उनका ईश्वर के समक्ष प्रायश्चित करना ही एक मात्र मुक्ति पाने का उपाय है। उन्होंने ईश्वर आराधना के साथ अच्छे कर्म करने का आह्वान कियाउन्होंने कथा के दौरान कहा कि मनु और शतरूपा के दो पुत्र और तीन पुत्रियां हुईं। पुत्रों के नाम प्रियव्रत और उत्तानपाद। राजा उत्तानपाद की दो रानियां थीं। एक का नाम सुरुचि और दूसरी का नाम सुनीति था। राजा सुरुचि को अधिक प्यार करते थे। उनके पुत्र का नाम उत्तम और सुनीति के पुत्र का नाम ध्रुव था। बालक ध्रुव एक बार पिता की गोद में बैठने की जिद करने लगता है लेकिन सुरुचि उसे पिता की गोद में बैठने नहीं देती है। ध्रुव रोता हुआ मां सुनीति को सारी बात बताता है। मां की आंखों में आंसू आ जाते हैं और वह ध्रुव को भगवान की शरण में जाने को कहती हैं। पांच वर्ष का बालक ध्रुव राज्य छोड़कर वन में तपस्या के लिए चला जाता है। नारद जी रास्ते में मिलते हैं और ध्रुव को समझाते हैं कि मैं तुम्हें पिता की गोद में बैठाउँगा लेकिन ध्रुव ने कहा कि पिता की नहीं अब परम पिता की गोद में बैठना है। कठिन तपस्या से भगवान प्रसन्न हो वरदान देते हैं। कथा में प्रमुख रूप से उपस्थित एडीजी जोन वाराणसी रामकुमार साहब एडीजी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड डीके ठाकुर साहब प्रमोद मिश्र पयासी शिव नारायण मिश्र राजू चौबे पिंटू चौबे जिला पंचायत सदस्य डॉ विमलेश कुमार मिश्र अनिल कुमार मिश्र शंभूनाथ सिंह पूर्व प्रधान हरिशंकर मिश्रा कालिका प्रसाद तिवारी दीनबंधु पांडे रामखेलावन पांडे देवी प्रसाद मिश्र मालिक सहित तमाम भक्तों मैं श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण किया